हरिगोपाल गौड़ जी ने नाना की चिट्ठी नाम से प्रति सप्ताह बच्चों के लिए चिट्ठी लिखी थीं। इनके द्वारा वे बच्चों को शिक्षा, अनुशासन, कर्तव्य सिखाते हैं वहीँ भ्रम, अन्धविश्वास से भी दूर ले जाते हैं। उनकी समस्त चिट्ठिया "नानाजी की चिट्ठिया" नाम से पुस्तकाकार हैं।

Thursday, November 12, 2009

अच्छा मित्र - नाना की चिट्ठी

प्रिय पाठक,
यह नानू का प्रथम पत्र है। मैं तुम से उन विषयों पर बात करूँगा जिन पर तुम्हें अपने विद्यालय और खेलकूद में व्यस्त रहने के कारण ध्यान देने का समय नहीं मिलता।
तुम्हें मित्र बनाना अवश्य पसंद है। एक सच्चा मित्र सदैव तुम्हारा साथ देगा। वह सही सलाह देगा और तुम्हें गलत रास्ते पर जाने से रोकेगा। परन्तु आज ऐसा मित्र अति सौभाग्यशाली व्यक्ति को ही मिलता है।
आज मैं तुम्हें ऐसे मित्र के बारे में बताता हूँ जो कभी तुम्हारा साथ नहीं छोड़ेगा। वह मित्र है ‘एक अच्छी पुस्तक’। नया ज्ञान, ढेर सारी जानकारी, जीवन के सभी पक्षों से परिचय और मनोरंजन उससे प्राप्त होता है। अन्य लोगों के सम्बन्ध में, उनके धर्म, रीति-रिवाज और विचारों की जानकारी देकर एक अच्छी पुस्तक हमें उनके प्रति अधिक उदार एवं संवेदनशील बनाती है।
सभी महान व्यक्तियों की पुस्तकें अच्छी मित्र बनी हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अनेक जेल यात्राओं में अपना समय पुस्तकें पढ़कर गुजारा और ‘भारत एक खोज’ और ‘विश्व इतिहास’ जैसी अच्छी पुस्तकों की रचना की।
अपने-अपने धार्मिक ग्रन्थों (गीता, कुरान, बाइबिल, गरुग्रंथ साहिब आदि) के अतिरिक्त अनेक अच्छी पुस्तकें विक्रेता के यहाँ मिलतीं हैं। अपने विद्यालय की लाइब्रेरी में तुम अपने कक्षा-शिक्षक की सहायता से पुस्तकें प्राप्त कर सकते हो।
सचमुच, एक अच्छी पुस्तक से बढ़कर तुम्हारा और कोई सच्चा मित्र नहीं होता।
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लेखक-हरिगोपाल गौड़

1 comment:

  1. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
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